चुनाव और बच्चे

दोस्तों, चुनावी माहौल चल रहा है, और क्या बच्चे, बड़े, बूढ़े, महिला सभी चुनावी चर्चा में मशगूल हैं।हम तो भैया, जब बच्चे थे, तो सिर्फ इतना मतलब चुनाव से रखते थे की “बिल्ले” मिल जाएँ और उसमें भी जो सबसे अच्छा हो जैसे कागज़ लोहे/टीन,प्लास्टिक में सबसे सुंदर वाला उसके लिए टांगे(घोडा गाड़ी) या रिक्शे के पीछे पीछे दौड़ते थे, कभी कभी दूर निकल जाते थे तो मार भी खाते थे।आज युग परिवर्तन है, बच्चे भी चुनाव और केंडीडेट के बारे में चर्चा करते हैं, अपनी राय भी व्यक्त करते हैं,परंतु उनकी राय उनकी स्वयम की न होकर मीडिया,घर में हो रही चर्चा,स्कूल में दोस्तों के साथ हुई बातचीत से प्रभावित होती है, क्यों की राजनीति के बारे में न तो स्कूल में और न ही घर में खुल कर चर्चा होती है और न ही उनको अपने विचार रखने का मौका मिलता है। प्रजातान्त्रिक देश में बच्चों का राजनीति पर खुल के चर्चा होना आवश्यक है, क्योंकि आने वाले समय में बच्चों को भी अपना नेता चुनना है या बनना है।

अभी कल ही की बात है कालोनी में दो बच्चे लड़ रहे थे, मैं बीच बचाव करने गया तो बच्चे बोले अच्छा अंकल से ही पूछ ले कौन अच्छा है ? मैंने पूछा क्या हुआ? क्यों लड़ रहे हो?क्या पूछना है? तब दोनों की बात सुन कर लगा की हमारी आने पीढ़ी को राजनीति और राजनेता के गुणधर्म,कर्तव्य हमारी सभ्यता और संस्कृति के अनुसार कैसी हो मालूम होना चाहिए।वे दोनों इसी प्रकार बहस कर रहे थे जैसे कि वे खुद ही किरदार हो एक मोदी जी का पक्ष ले रहा था एक राहुल जी का मैंने पूछा, बेटा ये जो बात आप कर रहे हो आपको कैसे मालूम हुई ?अंकल कल TV में तो आ रहा था, नहीं अंकल मेरे पापा ने मुझे ऐसा ही बताया और मेरा दोस्त भी बोल रहा था, मैंने कहा आपने खुद अपने नेता को जानने समझने कि कोशिश कभी की और तुम्हें मालूम है तुम्हारा नेता कैसा हो,उसके कर्तव्य, गुण धर्म क्या हों, दोनों चुप हो गए,मैंने आगे कहा क्या तुम्हें मालूम है, चुनाव क्या होता है? कैसे और क्यों होता है? इसकी क्या जरूरत है, वोट क्या होती है? वोट डालना क्यों जरूरी है? चुनाव आयोग क्या होता है? नहीं अंकल हमको इसमें से एक भी जानकारी नहीं है।   

तभी मेरे दिमाग में आया कि भारत जैसे देश में जहां आज के बच्चे कल के नागरिक हैं और उनको आने वाले समय में अपने नेता को चुनना है या फिर खुद नेता बनाना है तो उनको राजनीति और राजनेता के कर्तव्य, गुण धर्म से अवगत कराना आवश्यक है और यह समय बहुत ही अच्छा है जब वे खुद चुनाव पर चर्चा कर रहे हों और देश में चुनाव का माहौल है। आज हमें निम्न लिखित तरीके अपनाना चाहिए-

1॰ बच्चों को खुल कर अपने विचार रखने देना चाहिए।

  1. बच्चों को साहित्य के माध्यम से नेता के कर्तव्य, गुण धर्म समझाना या पढ़ाना चाहिए।

3.जिस भी स्तर पर वे चर्चा करें पक्ष और विपक्ष कि भूमिका में रहकर अपने नेता के अच्छे बुरे गुण धर्म कि चर्चा करना चाहिए, जिससे अपने नेता के बारे में उनकी राय स्पष्ट बने।

  1. राजनीति क्या होती है और उसकी क्या जरूरत है, पार्टियां क्यों बनती हैं,उनके अलग अलग झंडे सिद्धांत, नेता क्यों होते हैं,पक्ष विपक्ष क्या होता है और क्यों जरूरी है?
  2. चुनाव आयोग क्या होता है? उसकी क्या जरूरत?
  3. चुनाव कैसे होते है? मतदान क्या होता है? गुप्त मतदान क्या होता है और क्यों होता है?
  4. मतगणना कैसे होती है? वोट क्या होती है? कैसे डाली जाती है?जरूरी क्यों है?

8.विधानसभा,लोकसभा,राज्यसभा क्या होती है?

  1. राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,मंत्री की लोकतन्त्र में क्या भूमिका होती है?

जैसे विषय पर खुल कर चर्चा हो और यह बहुत ही उपयुक्त समय है जब हम उनको हर स्तर पर प्रायोगिक रूप में इसे समझा सकते हैं।अत: परिवार, समाज और संस्था का कर्तव्य है, की वे इस चुनावी माहौल मैं अपनी अपनी ज़िम्मेदारी को निभाएँ और देश के भविष्य और प्रजातन्त्र को मजबूत करें।

वोट जरूर डालें ये आपका अधिकार और कर्तव्य है, और देश के लिए जरूरी भी